The World of Poetry, Thoughts and Writings -By Shalu Makhija

when thoughts are translated in to words and find a platform to sail …

Fragile Nature

छोटी सी मुलाक़ात ये
क्यों लंबी कहानी है
शाम मिलने तो है आई
पर जल्द ही ढल जाती है।

छोटी सी खरोंच से
खून बह जाता है
नाज़ुक है ये शरीर
ऐसे ही ढह जाता है ।

उम्मीद ने दामन छोड़ा
तो धड़कना छोड़ देता है
दुर्बल सा है ये दिल
बस यूँ ही तूट जाता है ।

शब्दों के तीर चले तो
साथ छोड़ देते हैँ
कमज़ोर हैं ये रिश्ते
आखिर तो मुरझाते हैं ।

कोई लंबे वादे ना कर
एक पल लहर आती है
भंगुर सी ज़िन्दगी ये
क्षण में रूह निकल जाती है ।।

© Shalu Makhija

Venomous World

Drawing freshness from flowers
Eager to spread fragrance around
Delighted soul dancing in sky
Ended in tears while sharing her joy
What a venomous world around…

Filled with grasp n euphoria
Walking to catch the sight of sunrise
Gratified soul wished to paint vivacity
Erosive words broke her heart apart
What a venomous world around…

Collecting small pleasures of life
Ready to draw her sketch of love
Tornado shattered the dreaming soul
Defeated she dissembled in a shell
What a venomous world around..

Healing her deeper wounds
Begging strength from cosmic space
Gets bruised one final time
Bleeding soul now denies life
What a venomous world around..

©Shalu Makhija 07-05-17

पिंजरे में बचपन

Though I’m one of those billion parents of India, I feel the same pressure of education – sports n activities on kids, I think, plan and try my best to organise kids’ time in most productive ways…….

My heart writes …

पिंजरे में बचपन

बचपन पे तो बड़ा पहरा है ।
न जाने कितनी तारों से घिरा है ।।

पढ़ाई से आँकी गुणता तुम्हारी
खेलकूद बना आज मजबूरी
मासूमियत अब नहीं पहचान तुम्हारी
कदम बढ़ाना आज जरूरी

महत्वाकांक्षा की होड़ लगी है
हर कोई अव्वल कैसे आये
हर घंटा है नपा तुला सा
उम्मीदों के बोझ उठाए
पंछी पिंजरे में है बंध सा
पंख होते भी उड़ न पाए

सपने तो सिर्फ बागबाँ हैं देखते
तुम तो खुला आसमाँ हो ढूँढते
क्या वो पुरानी पीढ़ी सही थी
बचपन को जो उड़ने देती

बचपन पे तो बड़ा पहरा है ।
न जाने कितनी तारों से घिरा है।।

© Shalu Makhija 10-4-17

चाहत

ये चाहत भी बड़ी अजीब होती है
कभी ये ज़िन्दगी में रंग भर देती है
तो कभी ये गम भर देती है ।

दिल धड़कता तेज़ है
तो दिल रोता भी खूब है ।
आँखे सपने पिरोती रोज़ हैं
तो सपनो में दरारें डराती खूब हैंं।

ये चाहत भी बड़ी अजीब होती है
कभी ये ज़िन्दगी में रंग भर देती है
तो कभी ये गम भर देती है ।।

मंज़िल खूबसूरत हो जाती है
तो जिंदगी बेसूद भी लगती है।
बहार भी इसी से है
तो पतझड़ भी यही लाती है।

ये चाहत भी बड़ी अजीब होती है
कभी ये ज़िन्दगी में रंग भर देती है
तो कभी ये गम भर देती है ।

चाहत का जुनून कसक दे जाता है
बिना चाहत जीना तो भुलावा है ।
दिल और दर्द का तो पुराना नाता है
बिना दर्द के खुशी भी छलावा है।

ये चाहत भी बड़ी अजीब होती है
कभी ये ज़िन्दगी में रंग भर देती है
तो कभी ये गम भर देती है ।।

©Shalu Makhija 06-04-17

Women’s Day

She is  like a fresh breeze, makes your day.

She is like a soft seed, fragile but gives new life

She is like a pretty rose, steals beauty from the  moon.

She flows like a holy Ganga, where your final quest ends.

She is like a ” home” , shelter and final destination to rest.

She is like an iron pillar , strong and determined .

She is like a treasure hunt – all emotions reside here.

She is like a precious pen, you can not write your story without

She is like a salt in food – you can not live without

Her confusions and petty problems too empower others

Each day is Women’s Day but little space she gets to express

She is an answer – God exists and operates.

Dedicated to  Pretty Women Around – Today – Tomorrow and Always.

© Shalu Makhija 08/03/17

 

ये मुस्कुराहट

ये मुस्कुराहट तो ज़िन्दगी है

मुश्किल डगर आसान बना देती है ।

ये मुस्कुराहट तो चेहरे का नूर है
बड़ी शिद्दत से गम को जो छिपाती है ।

ये मुस्कुराहट तो अपनों का करार है
कितने अहेसास उसी में सिमट जाते हैं ।

ये मुस्कुराहट तो कातिलाना है
आँखों को ये जबाँ बना देती है ।

ये मुस्कुराहट तो उपलब्धि है
ग़म खा के भी नाराज़गी छिपा लेती है ।

ये मुस्कुराहट तो राज़दान है
कितनी गलतियाँ ऐसे ही निगल जाती है ।

ये मुस्कुराहट तो जवाब है
हज़ारों सवालों का जो दिल छेद जाते हैं ।

ये मुस्कुराहट तो नवाबी है
ना जाने कितनी दरारें यूँ ही भर देती है ।

ये मुस्कुराहट तो ज़िन्दगी है
मुश्किल डगर आसान बना देती है ।।

© Shalu Makhija 16-02-17 (more…)

ऊँची उड़ान

संभल संभल के बहुत चल लिया ऊँची उड़ान अब भरने दो । हिसाब किताब से मन भर गया अब बेहिसाब कदम बढ़ाने दो । दिन-वार के मेल मिलाये समय से परे अब जाने दो । नाप तोल के सीमा है बनायीं असीम अविरत अब बहने दो । जाँच परख के हाथ मिलाये बेफिक्र गलतियाँ अब […]

जटिल सरलता…

 

मोती पिरोते पिरोते माला बनानी चाही थी
न जाना वो माला कब गले का फंदा बन गयी ।

एक एक तन जोड़के घोंसला बनाना चाहा था
ना जाना कब मैं अपने पँखो से उड़ना भूल गयी ।

यूँ उम्र गुज़ार दी उस मकड़ी ने वो जाल बनाने में
ना जाना था एक दिन वो खुद ही उसमें फस गयी ।

सहज जतन से जिन रिश्तों को सालों से निभाया था
न जाना कब वो मुझ से ही इख़्तिलाफ़ कर गए ।

सीप ने भी हौले हौले अपना कवच बनाया था
ना जाना वो कवच ही कब उसकी कब्र बन गया।

सींचती रही मैं विश्वास की हर एक डोर को
ना जाना समय ने कब मेरा विश्वास ही सोख लिया ।

सजाती रही जिंदगी मैं अनगिनत मुखौटों से
न जाना कब ‘सरलता ‘एक शब्द बन के रह गयी।

© Shalu Makhija 28-01-17

Welcoming New Year ..

A day passes by A month rolls by.. 2016 glides by.. What remains are moments We lived we loved.. Neither Jan nor Feb puts smile on my lips Neither 1st nor 2nd reminds me something special What I cherish are moments We shared together.. Routine will continue Daily chores will not disappear.. What thrills are […]

मझधार के मोड़ पे

अजीब सी ये घुटन है
मन ये चाहे पंछी बन उड़ जाए
खुली हवाओं में पर फैलाएँ
पर बड़े उलझे से रास्ते हैं
बेबस हम किस आस में है
बड़ी तन्हा सी
ज़िन्दगी आजकल है।

लोगों की भीड़ है
हमसफ़र कोई नहीं
लफ़्ज़ों में दर्द है
सुनता कोई नहीं
आँखे जिसे ढूंढें
वो सहारा कोई नहीं
रिश्ते हज़ारों हैं
अपना कोई नहीं

शब्दों को हमने
लबों पे रोका है
आँसू भी बस अब
वहीँ पे ठिठके हैं
भीतर एक शोर सा है
दिल को जला रहा है
ना कमज़ोर दिखना चाहें
अजीब सी घुटन है
बड़ी तन्हा सी
ज़िन्दगी आजकल है।

यूँ तो हमने चाही
सपनों सी हकीकत
मुस्काते हुए चेहरे
और फुर्सत के वो दो पल
हँसी के ठहाके
तो दुःख में साझेदारी
धीमी सी रफ़्तार हो
पर रिश्तों का सहारा हो

सरल ये समझ
बेमानी लग रही है
हक़ की लडाई
हार से गए हैं
बहस में जीतने से
किनारा कर लिया
उम्मीद ने भी अब तो
दामन छुड़ा लिया
बड़ी तन्हा सी
ज़िन्दगी आजकल है ।।

© Shalu Makhija

Dedicated to sad moments where free powerful will takes back seat and allow the temperaments to rule.